मुंगेर में इको पार्क का आनंद ले सकेंगे पर्यटक
जिले के सोझी गंगा घाट पर बन रहे इको पार्क का आनंद शरहवासी जल्द ले सकेंगे। राष्ट्रीय जलीय जीव दर्शनीय स्थल के रूप में विकसित हो रहे इस स्थल पर आकर पर्यटक गंगा में डॉल्फिन के रोमांच को देख सकेंगे।यह...
जिले के सोझी गंगा घाट पर बन रहे इको पार्क का आनंद शरहवासी जल्द ले सकेंगे। राष्ट्रीय जलीय जीव दर्शनीय स्थल के रूप में विकसित हो रहे इस स्थल पर आकर पर्यटक गंगा में डॉल्फिन के रोमांच को देख सकेंगे।
यह पार्क लगभग बन कर तैयार है। इस महीने के अंत तक पार्क के उद्घाटन की संभावना है। पार्क के ऊपर से गुजरे बिजली की हाईटेंशन तार को हटाया जाना है। इसके बाद शहर के लोगों को यह आनंद मिलेगा।
वन प्रमंडल पदाधिकारी नीरज नारायण ने बताया कि दर्शनीय स्थल के रूप में विकसित करने का मकसद लोगों को डॉल्फिन के प्रति जागरूक करना है। यहां आने वाले पर्यटकों के लिए सभी सुविधाएं होंगी। उन्होंने बताया कि डॉल्फिन ट्रैकर भी रहेंगे जो पर्यटक को गाइड करेंगे। यहां चांदनी रात गंगा के साथ के तहत लोग चांदनी रात में गंगा में सैर सकेंगे।
ये होंगी सुविधाएं : एक एकड़ भूमि में बनाए गए इस दर्शनीय स्थल परिसर में पर्यटकों के लिए टूरिस्ट रेस्ट रूम के साथ ही बैठने के लिए बैंच भी अलग-अलग जलीय जीवों की आकृति में बनाए गए हैं ताकि लुप्त हो रहे जलीय जीव के प्रति लोग जागरूक हो सके। परिसर में शौचालय आदि की भी सुविधा रहेगी। परिसर में पौधे भी लगाए जाएंगे। सुबह में यहां टहलने आने वालों लोगों के लिए पैदल पथ भी होगा।
पार्क में वन एवं पर्यावरण विभाग की ओर से नौका विहार की भी व्यवस्था होगी। इसके लिए शुल्क भुगतान कर पर्यटक गंगा में सैर कर सकेंगे और डॉल्फिन के रोमांच का अनुभव कर सकेंगे। मत्स्य जीवी सहयोग समितियों के द्वारा भी नौका विहार की व्यवस्था होगी। मुंगेर वन प्रमंडल की ओर से समिति को नाव बनाने या खरीदने में सहयोग दी जाएगी। इसके बाद समिति की ओर से पर्यटकों को नौका विहार कराया जा सकेगा। यहां पर्यटक साल में 9 माह तक आनंद ले सकेंगे।
डॉल्फिन ट्रैकर करेंगे गाइड : सोझी घाट में बने पर्यटक स्थल पर डॉल्फिन ट्रैकर भी तैनात रहेंगे। ट्रैकर पर्यटकों के लिए गाइड का काम करेंगे। मत्स्यजीवी सहयोग समिति और वन एवं पर्यावरण की नौका पर ये ट्रैकर तैनात रहेंगे और पर्यटकों को गंगा व डॉल्फिन की जानकारी देंगे। साथ ही इस क्षेत्र के आसपास के भौगोलिक स्थितियों की भी जानकारी देंगे।
2000 है डॉल्फिन की संख्या : पूरे देश में डॉल्फिन की जनसंख्या की बात करें तो मात्र 2000 ही डॉल्फिन अब बचे हैं। विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुके डॉल्फिन को वर्ष 2009 में राष्ट्रीय जलीय जीव का दर्जा दिया गया। इसके प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए 5 अक्टूबर को डॉल्फिन दिवस मनाया जाता है। पटना से भागलपुर तक गंगा में 700 डॉल्फिन की जनसंख्या है जो अन्य जगहों की तुलना में ज्यादा है।
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